नई शुरुआत
प्रोफेशनल अपडेट: Network 18, हालांकि यह अब का अपडेट है, लेकिन जब मैं पत्रकारिता और मीडिया के बारे में ढेला भर का भी नहीं जानता था, नेशनल चैनल और मीडिया में कैसे काम होता है, तब मुझे इच्छा हुई जानने की, इसमें सबसे बड़ा योगदान अर्नब गोस्वामी का रहा, इस पर आपको हंसी आ रही होगी, जोर से हंस सकते हैं… लेकिन कोविड के दूसरे फेज का दौर और मैं अपने घर लखनऊ में रूम में अकेला बढ़िया सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सीरीज औऱ मूवी देख रहा था, लेकिन इससे पहले न मुझे टीवी में इंटेस्ट था नहीं ही सीरीज और चीज में जिसमें था वह जो नहीं पाया…यह ग्रेजुएशन का लास्ट ईयर भी था वह तो पूरा होने के बाद कुछ न कुछ करना था, तो 108 श्री अर्नब गोस्वामी अचानक गलती से मेरी टीवी प्रकट हुए सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या का रहस्य लेकर….फिर क्या पूरा एक घंटा मैंने सुना, टीवी मीडिया ने ड्रग्स गैंग और रिया चक्रवर्ती को क्रिमिनल बना था, मैंने तो उसको हत्यारा ही मान लिया था, साथ की दोस्तों के साथ मिलता तो वह भी उसे सुशांत को हत्यारा मानते और कहते यह तो है ही हत्यारिन ब्ला ब्ला कभी नहीं छुटेगी….देखिए एक शख्स छुट गया प्रदीप भंडारी जिसने कूद कूद कर जो पत्रकारिता की है वाह…क्या ही कहूं हंसी आती है अब मुझे खुद…लेकिन उस समय मुझे मजा आता था…लगता था कुछ तो कर रहा है बढ़िया…खैर उसके तीन महीने बाद ही मैंने एक छोटा से यूट्यूब से मीडिया में दाखिल हुआ…तीन महीने बाद छोड़ा तो न्यूज पोर्टल न्यूजट्रैक में गया…न्यूजट्रैक ने खबरों को समझना सिखाया डिजिटल मीडिया का ज्ञान दिया, अब बढ़िया 10 महीने बीत गए तो उब भी गया, क्योंकि लोग नई जगह जा रहे थे, मुझे भी लगा जाना चाहिए….नेशनल मीडिया में पहली इंट्री ईटीवी भारत में हुई….हैदराबाद….हैदराबाद ने सब्र सिखाया….जो मेरे पास नहीं था, शायद आज भी कमी है, लेकिन सीनियर का धन्यवाद….लेकिन एक साल से अधिक रहने के बाद यहां से भी मन भर गया आ गया दिल्ली, अब न मीडिया में भी काम करने का मन नहीं हो रहा था…तो जैसे तैसे काटे 8 महीने और फिर से पढ़ाई की औऱ आईआईएसी में पढ़ाई करने चला गया…कुछ लोगों ने इस फैसले को गलत भी बताया, लेकिन मुझे सही लगा और आज भी सही ही लगता है…करीब 10 महीने के ब्रेक के बाद इंडिया टीवी में ज्वाइन किया और इंडिया टीवी Wahooo, सिखाया कैसे टीवी मीडिया चलता है, ब्रेकिंग कैसे चलाते हैं न सिर्फ सीखा बल्कि तुरंत उसको चलाया भी….टीवी मीडिया या नेशनल टीवी में क्या प्रेशर होता इंडिया टीवी ने सीखाया, कोई चिल्लाए तो आप पर कैसे शांत रहकर खबर ब्रेक करनी है…ब्ला ब्ला, कई राज्यों के चुनाव डेढ़ साल में हुए, नेशनल मीडिया में रहने पर लगता है देश में सिर्फ चुनाव होते हैं क्योंकि चुनाव ही नहीं खत्म होते….हर राज्य में तीसरे महीने में चुनाव होता ही है…खैर सीनियर्स अच्छे मिले, ज्ञानी लोग…एक साल से अधिक समय काम करने के बाद लगा अब कही और जाना चाहिए….एक और नई पारी की शुरुआत नेटवर्क 18 से की है…


